
दिल्ली (इंसाफ़ टाइम्स डेस्क) बिहार विधानसभा में शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन विपक्षी दलों की तरफ़ से 65 पर्सेंट आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में डालने की मांग को लेकर हंगामा हो गया है
विपक्ष की ओर से विधानसभा में आरक्षण को लेकर कार्य स्थगन प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उसे विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार नहीं किया, हालांकि विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष को इस पर बोलने का मौका दिया
इस दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव जब बोलने लगे तो उस समय बीजेपी के दोनों डिप्टी सीएम से नोकझोंक हुई, इसके बाद विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया, बाहर मीडिया से बात करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा हम साथ में थे तब जातीय आधारित गणना करवाई,सर्वे के आधार पर आरक्षण सीमा 65 फीसदी बढ़ाने का काम किया,संविधान दिवस पर कम-से-कम सरकार यह बताएं कि उच्च न्यायालय ने रोक लगाया, हमने अंदेशा जाहिर किया था कि भाजपा के लोग कोर्ट जाकर निरस्त करायेंगे
आरजेडी के विधायक एवं मुख्य सचेतक अख्तरुल इस्लाम शाहिन ने कहा कि “संविधान की नौवीं अनुसूची में डाला जाए,आज सदन में हम लोग चर्चा के लिए कार्यस्थगन का प्रस्ताव देंगे,नीतीश कुमार के दम पर केंद्र सरकार चल रही, लेकिन सीएम करवा नहीं पा रहे, आगे उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक काला विधेयक है, विधानसभा से नीतीश कुमार खिलाफ में प्रस्ताव पारित करें”
विपक्षी दलों के विधायक के ज़रिए बैनर,पोस्टर के साथ विधानसभा के बाहर प्रदर्शन जारी है
बिहार में महागठबंधन सरकार जब थी तब बिहार सरकार 500 करोड़ रुपये खर्च कर खुद से जातीय गणना कराई थी,इसके बाद आरक्षण का दायरा बढ़ा कर 50 से 65 फीसद किया गया था, लेकिन पटना हाईकोर्ट में मामला चल गया, पटना हाईकोर्ट ने 65 फीसद आरक्षण को रद्द कर दिया, बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट भी गई, लेकिन वहां से झटका लग गया,अब महागठबंधन दबाव बना रहा है कि संविधान की 9वीं अनुसूची में डाला जाए