सहारनपुर में 10 साल की मुस्लिम बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या: आरोपी वेदप्रकाश गिरफ्तार, मगर ‘बेटी बचाओ’ के नारेदार क्यों हैं खामोश?

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर ज़िले से दिल दहला देने वाली एक खबर सामने आई है जहाँ एक 10 वर्षीय मासूम मुस्लिम बच्ची के साथ बलात्कार कर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। यह घटना न केवल अपराध की सीमा लांघती है, बल्कि समाज की खामोशी को भी कटघरे में खड़ा करती है। आरोपी की पहचान वेदप्रकाश के रूप में हुई है, जिसे पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है।

यह दिल दहला देने वाली घटना सहारनपुर के नकुड़ थाना क्षेत्र की है, जहाँ 10 मई की शाम बच्ची अचानक लापता हो गई थी। परिवार ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस और ग्रामीणों की तलाश के बाद अगले दिन बच्ची की लाश जंगल में मिली। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी वेदप्रकाश ने मासूम बच्ची के साथ बलात्कार किया, फिर उसकी हत्या कर शव को चादर में लपेट कर पूरी रात छिपाकर रखा और अगली सुबह जंगल में फेंक दिया।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि बच्ची के शरीर पर गहरी चोटों के निशान हैं और उसके जननांगों से खून बह रहा था। यह मामला सिर्फ़ एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि बर्बरता की पराकाष्ठा है।

पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी वेदप्रकाश को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ हत्या, बलात्कार और POCSO एक्ट के तहत सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि इस केस की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जाएगी।

इस वीभत्स वारदात पर मुख्यधारा मीडिया की चुप्पी और सामाजिक संगठनों की उदासीनता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जब उत्तराखंड के नैनीताल में एक मुस्लिम युवक पर बलात्कार का आरोप लगा था, तो पूरे शहर को बंद करा दिया गया था। सड़कों पर उग्र प्रदर्शन, दुकानों में तोड़फोड़, और सोशल मीडिया पर ‘बेटी बचाओ’ के नारों की बाढ़ आ गई थी।

मगर अब जब पीड़िता मुस्लिम है और आरोपी बहुसंख्यक समाज से है, तब वही समाज, वही आवाज़ें, और वही मीडिया खामोश क्यों हैं?

पीड़ित बच्ची के परिजनों ने आरोपी को फांसी की सज़ा और मामले की निष्पक्ष त्वरित सुनवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि उनकी बच्ची को न्याय तभी मिलेगा जब यह मामला पूरे देश में सुना जाएगा।

यह मामला सिर्फ़ कानून का नहीं, बल्कि इंसाफ और इंसानियत का भी है। सवाल यह है कि क्या बच्चियों की इज़्ज़त अब मज़हब देखकर मापी जाएगी? क्या इंसाफ भी पहचान पूछकर दिया जाएगा?

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