संभल हिंसा को लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कांग्रेस,आप,राजद,सपा,मजलिस व अन्य विपक्षी दलों की सख्त प्रतिक्रिया!न्यायालय,प्रशाशन और बार काउंसिल से भी की बड़ी मांग

दिल्ली (इंसाफ़ टाइम्स डेस्क) संभल में मस्जिद निरक्षण के लिए जाते हुए अधिवक्ता विष्णु जैन के ज़रिए जय श्री राम के नारे लगाती भीड़ को साथ ले जाने से शुरू हुई हिंसा को लेकर विपक्षी दलों के नेताओं की तरफ़ से कड़ी प्रतिक्रिया आई है

लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि “संभल में हालिया विवाद पर राज्य सरकार का पक्षपात और जल्दबाज़ी भरा रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. प्रशासन द्वारा बिना सभी पक्षों को सुने और असंवेदनशीलता से की गई कार्रवाई ने माहौल और बिगाड़ दिया और कई लोगों की मृत्यु का कारण बना. जिसकी सीधी ज़िम्मेदार BJP सरकार है”

संभल से सपा सांसद जियाउर रहमान बर्क ने कहा कि “मुसलमानों को टार्गेट करके उनके ऊपर अत्याचार किया जा रहा है. निर्दोषों की जान गई है. दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए पार्लियामेंट में आवाज़ उठाऊंगा, अल्लाह की अदालत से कोई नहीं बच पाएगा”

राज्य सभा में राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने पूछा कि “आज संभल में जो कुछ हुआ, उसके मद्देनजर क्या ‘पूजा स्थल अधिनियम 1991’ का कोई संवैधानिक/कानूनी महत्व है? माननीय सुप्रीम कोर्ट क्या आप संभल में लोगों की जान जाने के बावजूद मूकदर्शक बने रहेंगे”

वायनाड से सांसद सह कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने एक्स पर लिखा कि “संभल,उत्तर प्रदेश में अचानक उठे विवाद को लेकर राज्य सरकार का रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है संवेदनशील मामले में बिना दूसरा पक्ष सुने, बिना दोनों पक्षों को विश्वास में लिए प्रशासन ने जिस तरह कार्रवाई की, वह दिखाता है कि सरकार ने खुद माहौल खराब किया,प्रशासन ने जरूरी प्रक्रिया और कर्तव्य का पालन भी जरूरी नहीं समझा,सत्ता में बैठकर भेदभाव, अत्याचार और फूट फैलाने का प्रयास करना न जनता के हित में है, न देश के हित में,माननीय सुप्रीम कोर्ट को इस मामले का संज्ञान लेकर न्याय करना चाहिए,प्रदेश की जनता से मेरी अपील है कि हर हाल में शांति बनाए रखें”

यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी संभल की हिंसा को लेकर यूपी सरकार को घेरा,उन्होंने कहा “सर्वे के नाम पर तनाव फैलाने की साजिश का ‘सर्वोच्च न्यायालय’ तुरंत संज्ञान ले और जो अपने साथ सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने के उद्देश्य से नारेबाजों को ले गए, उनके खिलाफ शांति और सौहार्द बिगाड़ने का मुकदमा दर्ज हो और उनके खिलाफ ‘बार एसोसिएशन’ भी अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई करे,यूपी शासन-प्रशासन से न कोई उम्मीद थी,न है”

ऑल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने लिखा कि “यह मस्जिद कोई 50 या 100 साल पुरानी नहीं बल्कि ढाई सौ से 300 साल पुरानी है, कोर्ट ने मस्जिद के लोगों की बात सुने ही बना ही सर्वे का आदेश दे दिया,जब दूसरी बार सर्वे किया गया तो इसकी किसी को जानकारी नहीं दी गई थी,वहीं सर्वे का वीडियो सामने आया और उसमें देखा जा सकता है कि वहां उकसाऊ नारेबाजी हो रही थी,जो लोग सर्वे करने आए थे वही नारेबाजी कर रहे थे,यह फायरिंग नहीं बल्कि हत्या है, जो भी अधिकारी संदिग्ध हैं, उनपर कार्रवाई होनी चाहिए,इसके अलावा हाई कोर्ट को इस मामले की जांच करवानी चाहिए,यह केवल अत्याचार है”

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि “संभल में जो हिंसा हुई उसका पूरा प्रकरण उठा कर देखें कि किसे हिंसा हुई,काशी और मथुरा में निरक्षण हुआ कोई हिंसा नहीं हुई,ये सरकार प्रायोजित हिंसा है,ये साज़िश के तहत कराई गई हिंसा है,एक ही घंटे में निर्णय आ जाता है बगैर दूसरे पक्ष को सुने और एक ही घंटे के सर्वे शुरू हो जाता है,ऐसा किसी आम आदमी के मामले में न्यायालय और प्रशाशन की कार्रवाई आप के देखी है?,उत्तरप्रदेश कि सरकार चाहती है कि वहां लगातार दंगे फ़साद हो और नफ़रत की भाषा हो”

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