सीमांचल से बदलाव की दस्तक: किशनगंज की सभी 04 सीटों सहित बिहार की 45+ सीटों पर चुनावी मैदान में उतरेगी SDPI, अफ़ताब तैमि ने किया बड़ा ऐलान

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (एसडीपीआई) ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर कमर कस ली है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. आफ़ताब तैमि की अगुवाई में प्रदेशभर में संगठनात्मक बैठकें और रणनीति तैयारियों का दौर तेज़ हो गया है। एसडीपीआई की योजना राज्य की 45 से अधिक सीटों पर मज़बूती से उम्मीदवार उतारने की है।

पार्टी विशेष तौर पर किशनगंज की सभी चार विधानसभा सीटों के अलावा कटिहार, अररिया और पूर्णिया की तीन-तीन विधानसभा क्षेत्रों में अपने जनाधार को मज़बूत करने में जुटी है। साथ ही दरभंगा, वैशाली, शिवहर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, मधुबनी, पश्चिमी और पूर्वी चंपारण, सारण, सिवान, गोपालगंज और मधेपुरा की विधानसभाओं में भी पार्टी की सक्रियता बढ़ चुकी है।

इंसाफ़ टाइम्स से खास बातचीत में डॉ. आफ़ताब तैमि ने कहा, “जो पार्टियां सामाजिक न्याय की बात करती हैं, उन्होंने मुसलमानों और दलित-आदिवासियों को सिर्फ़ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया। उनके बीच से नेतृत्व को उभरने नहीं दिया गया। बिहार के विकास को देशभर में शर्मनाक स्थिति में ला दिया गया है। रोजगार और बेहतर शिक्षा के लिए यहां के नौजवान दूसरे राज्यों में भटकने को मजबूर हैं।”

उन्होंने पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने के बार-बार किए गए वादों को ‘झुनझुना’ करार देते हुए कहा कि इससे बिहार को केवल छलावा मिला है।

सीमांचल के पिछड़ेपन को लेकर उन्होंने कहा, “आज भी सीमांचल के गांवों में सड़क, पानी और टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। यह क्षेत्र आज भी देश के विकास से सौ साल पीछे है। सरकारें चुनाव के वक़्त सीमांचल में वोट लेने आती हैं, मगर विकास की चिंता नहीं करतीं।”

डॉ. आफ़ताब ने सीमांचल के लिए स्पेशल स्टेटस की मांग को ज़रूरी बताया और कहा कि अब वक्त आ गया है कि इस मुद्दे पर जनांदोलन खड़ा किया जाए।

उन्होंने कहा, “एसडीपीआई बिहार चुनाव को पाकिस्तान, आतंकवाद, जात-पात और धर्म जैसे बंटवारे के मुद्दों से निकालकर शिक्षा, रोजगार, विकास, सामाजिक न्याय और सीमांचल की तरक्की जैसे वास्तविक मसलों पर लेकर आएगी। हम सभी राजनीतिक दलों को मजबूर करेंगे कि वे इन मुद्दों पर बात करें। विधानसभा पहुंचकर इन मसलों का समाधान निकालना ही हमारा लक्ष्य है।”

एसडीपीआई ने संकेत दिया है कि वह बिहार में एक मज़बूत विकल्प के रूप में उभरने की तैयारी में है और आने वाले दिनों में पार्टी की गतिविधियां और अधिक तेज़ होंगी

खुदाबख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी को मिली नई नेतृत्वकारी दिशा, उर्दू साहित्य के प्रतिष्ठित शोधकर्ता प्रोफेसर ज़ाहिदुल हक़ निदेशक नियुक्त

प्रख्यात उर्दू विद्वान, शायर और आलोचक प्रोफेसर ज़ाहिदुल हक़ ने आज ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व

मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी एलुमनाई फ्रेटरनिटी (एमएएफ) ने बिहार के नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू विषय को शामिल नहीं किए जाने पर जताई गहरी चिंता

मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी एलुमनाई फ्रेटरनिटी (एमएएफ) ने बिहार सरकार द्वारा “सेवन रिजॉल्व्स-3 (2025-30)”

शोध को वास्तविक समाधानों में बदलना:ज़हूर हुसैन बट

आईआईटी कानपुर-एनवाईयू टंडन स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग की साझेदारी यह दिखाती है कि उभरती प्रौद्योगिकियों में

मज़फ्फरपुर में उर्दू भाषा प्रकोष्ठ का प्रतियोगिता कार्यक्रम: विद्यार्थियों ने प्रस्तुत की उत्कृष्ट प्रतिभा, ‘उर्दू नामा’ पत्रिका का हुआ लोकार्पण

उर्दू निदेशालय, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार सरकार की योजना के अंतर्गत उर्दू भाषा सेल, मज़फ्फरपुर