
तमिलनाडु में विधानसभा के पूरे 234 सीटों के लिए इस बार 21 अप्रैल को एक ही चरण में वोट डाले जायेंगे, इस बार का विधानसभा चुनाव तमिलनाड़ू की राजनीति के दो धुरंधरों जयललिता और करूणानिधी की गैर मौजुदगी में हो रहा हैl एक तरफ सत्ताधारी अन्ना द्रमुक (एआईडीएमके) अपने 10 सालों के उपलब्धियों को लेकर मैदान में है, वहीं करूणानिधि की गैरमौजूदगी में एम के स्टालिन के नेतृत्व में द्रमुक (डीएमके)लगातार सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर घेर रही हैl इस बार लगभग 5 दशकों के बाद की राजनीति में अम्मा और करूणा की अनुपस्थिती है और दोनों पार्टीयों का नेतृत्व नए लोगों के हाथों में है, अम्मा(जयललिता) की मौत के बाद एआईडीएम के लगातार अंतर कलह से जुझ रही है, चाहे वो अम्मा की सहयोगी रहीं शशिकला का विवाद हो या अम्मा के भरोसेमंद रहे पूर्व मुख्यमंत्री अो पनेरसेलवम का विवाद हो लेकिन इन सारे विवादों को दर किनार करके मुख्यमंत्री ई पलानीस्वामी लगातार न केवल आगे बढ रहे हैं बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में एक लोकप्रिय चेहरा बन गए हैंl वहीं अंतरकलह डीएमके में भी था चूँकी करूणानिधि ने अपने जीवन में ही एम के स्टालिन को अपना उतराधिकारी घोषित कर दिया था सो यहाँ विवाद ज़्यादा बढा नहींl अब अगर अभी के चुनावी समीकरण की बात करें तो सत्ताधारी एआईडीएमके बीजेपी के साथ मिल कर चुनाव लड़ रही है वहीं डीएमके नें कांग्रेस और वाम दलों (सीपीआई व अन्य) को अपने गठबंधन में शामिल किया हैl इसके अतिरिक्त अन्ना द्रमुक से निकले दीनाकरण एआईएमआईएम, एसडीपीआई और अन्य छोटे दलों के साथ गठबंधन करके दोनो प्रमुख गठबंधनों के कोर वोट में सेंधमारी कर रहे हैं, इस गठबंधन के साथ राज्य के मुस्लिम विशेष कर युवाअों का अच्छा खासा समर्थन हैl वहीं कमल हासन और वाईको भी अलग मोर्चा खोले हुए हैंl लेकिन प्रमुक मुकाबला द्रमुक और अन्ना द्रमुक गठबंधन के बीच ही है, अन्ना द्रमुक(एआईडीएमके) पिछले एक दशक से सत्ता में है और सत्ता विरोधी लहर का ज़बरदस्त सामना कर रही है साथ ही उसके पास अब अम्मा(जयललिता) जैसा नेतृत्व भी नहीं है तथा वह आंतरीक कलह से जुझ रही है, ऐसे में उसकी राह इस बार आसान नही दिख रही हैl वहीं दश साल से सत्ता से दूर द्रमुक(डीएमके) स्टालिन के नेतृत्व में इस बार बिल्कुल सत्ता पाने के लिए करो या मरो की स्थिती मे है, वह लगातार सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रही है साथ ही वह राज्य के लोगों को अन्ना द्रमुक की सहयोगी भाजपा के सरकार में दखलअंदाजी का भी आरोप लगा रही हैl तमिलनाडु का चुनाव लोकलुभावन वादों के लिए जाना जाता है और इस बार भी राजनीतिक दल लोकलुभावन वादों के साथ लोगों के बीच जा रहे हैं, चाहे वो मुफ्त वाशींग मशीन का बादा हो या महिलाअों के लिए किरायें में छुट का वादा, लगभग हर दल इस प्रकार के वादें कर रहें हैंl अभी हाल ही में केंद्र सरकार ने दक्षिण के सुपर स्टार रजनीकांत को फिल्म जगत का प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरूस्कार से नवाज़ा इसे भी तमिलनाडु के चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा हैl डीएमके ने भी इस बार चुनाव जीतने पर टैक्सों में कटौती कर पेट्रोल के दाम कम करने का वादा किया हैl वहीं अब देखना दिलचस्प होगा की दक्षिण के इस राज्य में कौन मैदान मारता है तथा जनता किसे अपना मत देकर सत्ता सौंपती है, लेकिन इसके लिए हमें 2 मई का इंतज़ार करना होगा|