
इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
बिहार सरकार ने राज्य में द्वितीय राजभाषा उर्दू के प्रभावी कार्यान्वयन को लेकर एक अहम आदेश जारी किया है। यह फैसला जनता दल (यूनाइटेड) अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ, पूर्वी चंपारण के महासचिव आलीशान शमीम हाशमी की पहल और बिहार विधान परिषद के सदस्य व जदयू के राष्ट्रीय महासचिव आफाक अहमद खान के अनुरोध पर लिया गया है।
मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के तहत उर्दू निदेशालय ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि वे सरकारी कार्यालयों, खासकर नवनिर्मित समाहरणालय भवन में, उर्दू भाषा में साइनेज लगाने और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। इस आदेश का मकसद सरकारी दफ्तरों में उर्दू भाषा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना और इसके प्रचार-प्रसार को सुनिश्चित करना है।
आलीशान शमीम हाशमी ने इस फैसले को उर्दू भाषी जनता के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम उर्दू भाषा के विकास और सरकारी कामकाज में इसकी भागीदारी को मजबूत करेगा। साथ ही, उन्होंने आफाक अहमद खान का आभार जताया, जिनके प्रयासों से यह आदेश लागू हुआ।
इस फैसले से उर्दू भाषी समुदाय को बड़ी राहत मिलेगी, जो लंबे समय से सरकारी दफ्तरों में उर्दू भाषा को लागू करने की मांग कर रहा था। जदयू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने भी इस पहल को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है और भविष्य में उर्दू भाषा को और मजबूत करने के लिए लगातार काम करने का भरोसा दिया है।
सरकार के निर्देश के तहत, उर्दू भाषा में सूचना पट्ट, साइनेज और सरकारी आदेशों को लागू करने के लिए विभिन्न विभागों को कहा गया है। इसके अलावा, सरकारी कामकाज में उर्दू भाषा को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अन्य कदम भी उठाने पर विचार किया जा रहा है।
यह फैसला बिहार में भाषा संवर्धन की दिशा में एक नया अध्याय जोड़ने और उर्दू भाषी समुदाय की मांगों को पूरा करने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।