मुफ्फरपुर में 26 अप्रैल को “वक्फ बचाओ, संविधान बचाओ” विशाल जुलूस, तमाम धार्मिक-सामाजिक संगठनों की एकजुटता

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और संविधान की हिफाजत को लेकर पूरे देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इसी कड़ी में “वक्फ बचाओ, संविधान बचाओ संयुक्त मंच” के बैनर तले मुजफ्फरपुर में भी 26 अप्रैल 2025 को एक बड़ा विरोध जुलूस निकाला जाएगा। इस आयोजन की अपील मुजफ्फरपुर सिविल सोसाइटी और मुजफ्फरपुर मिल्लत कमिटी की ओर से की गई है।

यह ऐलान शहर के प्रमुख मुस्लिम संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक में किया गया। बैठक में सर्वसम्मति से तय हुआ कि जुलूस सुबह 10 बजे जेल चौक, चंदवारा से शुरू होकर पक्की सराय, हाथी चौक, पानी टंकी चौक, कल्याणी चौक, मोतीझील, सदर अस्पताल रोड होते हुए कम्पनी बाग डीएम कार्यालय तक जाएगा।

तमाम संगठनों की भागीदारी

इस शांतिपूर्ण जन आंदोलन में तंजीम अमारत-ए-शरीया मुजफ्फरपुर, इदारा-ए-शरीया, जमीयत अहले हदीस, जमाअत इस्लामी हिंद, मुस्लिम मजलिसे मशावरत, इंसाफ मंच और जमाअत-ए-अहले तशीय्यो जैसे प्रमुख संगठनों की सहभागिता रहेगी। इन सभी संगठनों ने मिलकर वक्फ संशोधन कानून 2025 को संविधान विरोधी बताते हुए इसके खिलाफ आवाज बुलंद करने की अपील की है।

अपीलकर्ताओं में कौन-कौन शामिल

इस जुलूस को सफल बनाने की अपील करने वालों में मौलाना आले हसन (प्राचार्य, मदरसा इस्लामिया जामिया उलूम), मौलाना मुफ्ती इकबाल अहमद कासमी (उस्ताद-ए-हदीस), मौलाना शमीम कादरी (काज़ी शहर, इदारा-ए-शरीया), शिया स्कॉलर असद यावर, मौलाना मुतीउर रहमान रज़वी, मौलाना क़मर सुबहानी, मौलाना बिलाल अहमद रहमानी (संयुक्त सचिव, अमारत-ए-शरीया), मुफ्ती मोहम्मद इरफान कासमी, मौलाना वसी आलम रियाज़ी, प्रो. फारूक अहमद सिद्दीकी (पूर्व अध्यक्ष, उर्दू विभाग, बिहार यूनिवर्सिटी), प्रो. अबूजर कमालुद्दीन (अध्यक्ष, मुस्लिम मजलिसे मशावरत बिहार), डॉ. महमूद-उल-हसन (जमाअत इस्लामी), जनाब आफताब आलम (उपाध्यक्ष, इंसाफ मंच), इंजीनियर जफर अज़म रब्बानी, जनाब इश्तियाक अहमद, जनाब सैयद माजिद हुसैन (पूर्व डिप्टी मेयर), जनाब शुऐब अहमद, जनाब खालिद रहमानी, जनाब एजाज अहमद, जनाब वसीम अहमद मुन्ना शामिल हैं।

आयोजकों की अपील

आयोजकों ने सभी इंसाफ पसंद नागरिकों से इस ऐतिहासिक और लोकतांत्रिक संघर्ष में लाखों की संख्या में शामिल होने की अपील की है ताकि वक्फ कानून में किए जा रहे संविधान विरोधी संशोधन के खिलाफ जनभावना को मजबूती से सरकार के सामने रखा जा सके।

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